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Neurology

Home Health Blog | May 07, 2026 | 11 min read

पैरों में झनझनाहट और सुन्नपन (Numbness in Feet) के कारण और प्रभावी इलाज

पैरों में झनझनाहट और सुन्नपन (Numbness in Feet) के कारण और प्रभावी इलाज

क्या आपने कभी महसूस किया है कि लगातार एक ही स्थिति (Posture) में बैठे रहने के बाद जब आप खड़े होते हैं, तो आपके पैरों में चींटियां चलने जैसा अहसास या 'सुइयां चुभने' जैसी झनझनाहट (Tingling) होती है? मेडिकल भाषा में इसे "पैरास्थीसिया" (Paresthesia) कहा जाता है। आमतौर पर यह कुछ मिनटों में ठीक हो जाता है। लेकिन, यदि यह झनझनाहट बार-बार हो रही है, बिना किसी कारण के हो रही है, या सुन्नपन (Numbness) के साथ लगातार बनी रहती है, तो यह किसी गंभीर तंत्रिका तंत्र (Nervous System) की बीमारी का संकेत हो सकता है। आइए इस समस्या की गहराई को समझें।

"पैरों में लगातार झनझनाहट या सुन्नपन को कभी भी 'आम बात' समझकर नहीं टालना चाहिए। यह अक्सर नसों के डैमेज होने की शुरुआत होती है। सही समय पर इलाज न होने पर यह स्थायी विकलांगता का कारण भी बन सकती है।"

पैर में झनझनाहट (Tingling and Numbness) के मुख्य कारण

पैरों में झनझनाहट और सुन्नपन के पीछे कई न्यूरोलॉजिकल (नसों से जुड़े) और सिस्टमिक (पूरे शरीर को प्रभावित करने वाले) कारण हो सकते हैं। सबसे प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:

1. डायबिटिक न्यूरोपैथी (Diabetic Neuropathy)

लगातार पैरों में झनझनाहट का सबसे बड़ा कारण मधुमेह (Diabetes) है। जब रक्त में शुगर का स्तर लंबे समय तक अधिक रहता है, तो यह शरीर की छोटी नसों (Peripheral nerves) को नुकसान पहुंचाता है। इसके कारण पैरों के तलवों से लेकर घुटनों तक जलन, झनझनाहट, दर्द और अंततः सुन्नपन आ जाता है। यदि आपको झनझनाहट के साथ ज्यादा प्यास लगती है या बार-बार पेशाब आता है, तो तुरंत अपना ब्लड शुगर चेक करवाएं।

2. नसों का दबना (Nerve Compression / Sciatica)

यदि आपकी कमर के निचले हिस्से (Lower back) में रीढ़ की हड्डी के बीच की डिस्क खिसक गई है (Herniated disc), तो वह वहां से निकलने वाली 'साइटिक नर्व' (Sciatic nerve) पर दबाव डालती है। इसके कारण कमर से लेकर पैरों के नीचे तक एक तेज दर्द और भयंकर झनझनाहट होती है जिसे साइटिका (Sciatica) कहते हैं।

3. विटामिन B12 की कमी (Vitamin B12 Deficiency)

विटामिन B12 तंत्रिकाओं (Nerves) के बाहरी सुरक्षा कवच (Myelin sheath) को बनाने और स्वस्थ रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसकी कमी होने पर यह कवच टूटने लगता है, जिससे तंत्रिकाएं सही से काम नहीं कर पातीं। इसके परिणामस्वरूप पैरों और हाथों में झनझनाहट, सुई चुभने जैसा अहसास, अत्यधिक थकान और याददाश्त कमजोर होने जैसी समस्याएं होती हैं। यह शाकाहारी लोगों में बहुत आम है।

4. परिधीय धमनी रोग (Peripheral Artery Disease - PAD)

यह रक्त संचार से जुड़ी एक बीमारी है जिसमें पैरों तक शुद्ध रक्त ले जाने वाली धमनियों (Arteries) में फैट (प्लाक) जमा हो जाता है और वे संकरी हो जाती हैं। पैरों तक पर्याप्त ऑक्सीजन और रक्त न पहुंचने के कारण उनमें झनझनाहट, ठंडक और चलते समय मांसपेशियों में ऐंठन (Cramps) होती है।

5. ऑटोइम्यून बीमारियां (Autoimmune Diseases)

रूमेटाइड अर्थराइटिस (RA), ल्यूपस या मल्टीपल स्केलेरोसिस (MS) जैसी बीमारियों में शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से अपनी ही स्वस्थ नसों और ऊतकों पर हमला करने लगता है। इसके कारण नसों में सूजन आ जाती है और पैरों में सुन्नपन व झनझनाहट शुरू हो जाती है।

6. थायरॉयड विकार (Hypothyroidism)

जब थायरॉयड ग्रंथि अंडरएक्टिव (कम सक्रिय) होती है, तो शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। क्रोनिक हाइपोथायरायडिज्म के मामलों में, तरल पदार्थ का जमाव होने से नसों पर दबाव पड़ता है, जिससे परिधीय न्यूरोपैथी (Peripheral neuropathy) विकसित होती है।

अन्य महत्वपूर्ण कारण

लक्षण जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए (Red Flag Symptoms)

पैरों में झनझनाहट के साथ यदि आपको इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट (Neurologist) से संपर्क करें:

  • झनझनाहट का अचानक शुरू होना और तेजी से पूरी टांगों में फैल जाना।
  • पैरों में इतनी कमजोरी आना कि चलने में लड़खड़ाहट हो या आप गिर जाएं (लखवा/Paralysis का संकेत)।
  • मूत्र या मल विसर्जन पर नियंत्रण न रहना (Bowel/Bladder Incontinence)।
  • झनझनाहट के साथ-साथ बोलने में लड़खड़ाहट या चेहरे का सुन्न होना (यह स्ट्रोक/Stroke का संकेत है, तुरंत इमरजेंसी में जाएं)।
  • पैरों में किसी घाव या कट का होना, जिसका आपको सुन्नपन के कारण दर्द महसूस न हो।

डॉक्टर सही कारण का पता कैसे लगाते हैं? (Diagnosis)

एक विशेषज्ञ न्यूरोलॉजिस्ट या जनरल फिजिशियन सटीक निदान के लिए निम्नलिखित परीक्षणों (Tests) की सलाह दे सकते हैं:

पैरों की झनझनाहट कम करने के घरेलू उपाय और देखभाल

मेडिकल इलाज के साथ-साथ आप घर पर इन उपायों को अपनाकर राहत पा सकते हैं:

1. पैरों की गर्म सिकाई और मालिश (Warm Compress & Massage)

गर्म पानी से सिकाई करने या सरसों/जैतून के तेल को हल्का गर्म करके मालिश करने से पैरों में रक्त संचार (Blood circulation) बढ़ता है और मांसपेशियों को आराम मिलता है। (ध्यान दें: यदि आपके पैर सुन्न हैं, तो पानी का तापमान पहले हाथ से चेक करें ताकि पैर जले नहीं)।

2. विटामिन युक्त आहार (Nutrient-rich Diet)

विटामिन B12 और अन्य बी-विटामिन्स की कमी को पूरा करने के लिए अपने आहार में दूध, दही, पनीर, अंडे, मछली और हरी पत्तेदार सब्जियां शामिल करें। डॉक्टर की सलाह पर आप विटामिन B12 या न्यूरोट्रॉपिक विटामिन्स के सप्लीमेंट्स भी ले सकते हैं।

3. नियमित व्यायाम (Regular Exercise)

रोज 30 मिनट तेज गति से चलने (Brisk walking), तैराकी (Swimming) या साइकिल चलाने से पूरे शरीर, विशेषकर पैरों में रक्त का प्रवाह बेहतर होता है और नसों को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती है।

4. आरामदायक फुटवियर (Proper Footwear)

बहुत तंग जूते (Tight shoes) या हाई हील्स पहनने से पैरों की नसों पर सीधा दबाव पड़ता है। हमेशा ऐसे जूते पहनें जिनमें पैरों की उंगलियों को पर्याप्त जगह (Toe box) मिले और जो पैरों को अच्छा सपोर्ट दें।

निष्कर्ष

पैर में झनझनाहट होना एक ऐसी समस्या है जो आपके रोजमर्रा के जीवन को गहराई से प्रभावित कर सकती है। यदि यह समस्या जीवनशैली में बदलाव या आराम करने से ठीक नहीं होती है, तो इसका मतलब है कि आपकी नसें मदद मांग रही हैं।

संकल्प हॉस्पिटल (अंबिकापुर) का न्यूरोलॉजी और इंटरनल मेडिसिन विभाग नसों से जुड़ी हर प्रकार की बीमारी के सटीक डायग्नोसिस (NCV, EMG, MRI) और उन्नत इलाज के लिए पूरी तरह से तैयार है। यदि आपको सुन्नपन, झनझनाहट या साइटिका की समस्या है, तो आज ही हमारे विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श लें और अपनी नसों को स्थायी डैमेज से बचाएं।

Frequently Asked Questions

हाँ, पैरों में झनझनाहट, जलन या सुई चुभने जैसा अहसास (Peripheral Neuropathy) नसों की कमजोरी या डैमेज होने का सबसे पहला और प्रमुख लक्षण है। यह अक्सर ब्लड शुगर बढ़ने (डायबिटीज), विटामिन B12 की कमी या रीढ़ की हड्डी में नस दबने के कारण होता है।

यदि झनझनाहट का मुख्य कारण केवल 'विटामिन B12 की कमी' है, तो डॉक्टर द्वारा दी गई विटामिन B12 की गोलियां या इंजेक्शन (Methylcobalamin) लेने से कुछ हफ्तों से लेकर महीनों के भीतर यह समस्या पूरी तरह ठीक हो सकती है। लेकिन यदि कारण डायबिटीज या नस दबना है, तो केवल विटामिन से पूरी राहत नहीं मिलेगी।

साधारण झनझनाहट आमतौर पर तलवों या पंजों में सीमित रहती है (जैसे डायबिटीज या विटामिन कमी में)। जबकि साइटिका में, नस रीढ़ की हड्डी (कमर) में दबती है, इसलिए दर्द और झनझनाहट एक करंट की तरह कमर (Lower back) से शुरू होकर कूल्हे (Hip) से होते हुए पैर के पिछले हिस्से तक नीचे जाती है।

लंबे समय तक पैर पर पैर चढ़ाकर या पालथी मारकर बैठने से घुटने के पास की 'पेरोनियल नर्व' (Peroneal nerve) पर दबाव पड़ता है। इससे पैर अस्थायी रूप से सुन्न (Sleepy foot) हो जाता है। आमतौर पर खड़े होने पर यह कुछ मिनटों में ठीक हो जाता है, लेकिन ऐसा रोज और घंटों तक करने से नसों पर स्थायी दबाव पड़ सकता है।

NCV टेस्ट यह जांचने के लिए किया जाता है कि नसें कितनी तेजी से और सही तरीके से बिजली के सिग्नल भेज रही हैं या नहीं। इससे यह पता चलता है कि नसें कहां और कितनी डैमेज हैं। इस टेस्ट में हल्के बिजली के झटके (Mild electrical impulses) दिए जाते हैं जो थोड़े असुविधाजनक (Uncomfortable) हो सकते हैं, लेकिन यह दर्दनाक या खतरनाक नहीं होता।

दुर्भाग्यवश, एक बार जब क्रोनिक हाई ब्लड शुगर से नसें स्थायी रूप से डैमेज हो जाती हैं, तो उन्हें 100% वापस पहले जैसा नहीं किया जा सकता। हालांकि, ब्लड शुगर को कड़ाई से कंट्रोल करके, नसों की दवाइयां (जैसे Pregabalin/Gabapentin) लेकर और जीवनशैली में बदलाव करके दर्द और झनझनाहट को काफी हद तक कम किया जा सकता है और आगे के डैमेज को रोका जा सकता है।

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