Blood Health & Cancer Awareness

Home Health Blog | August 9, 2026 | 12 min read

Bone Marrow Meaning in Hindi (बोन मैरो क्या होता है?): कार्य, प्रकार और बीमारियाँ

Bone Marrow Meaning in Hindi (बोन मैरो क्या होता है?): कार्य, प्रकार और बीमारियाँ

आपने अक्सर "बोन मैरो" (Bone Marrow) या "अस्थि मज्जा" शब्द सुना होगा — खासकर तब जब बात खून की बीमारियों, कैंसर या बोन मैरो ट्रांसप्लांट की होती है। लेकिन असल में बोन मैरो क्या होता है और यह हमारे शरीर के लिए इतना ज़रूरी क्यों है? संकल्प हॉस्पिटल, अंबिकापुर के रक्त रोग विशेषज्ञों द्वारा तैयार इस लेख में हम आसान हिंदी में समझेंगे कि बोन मैरो का मतलब क्या है, इसके कार्य, प्रकार, इससे जुड़ी बीमारियाँ और उन्हें पहचानने के तरीके।

बोन मैरो (अस्थि मज्जा) क्या होता है?

बोन मैरो हमारी हड्डियों के अंदर पाया जाने वाला नरम, स्पंज जैसा ऊतक (tissue) है। यह मुख्य रूप से बड़ी हड्डियों — जैसे कूल्हे की हड्डी, रीढ़, पसलियों, छाती की हड्डी और जांघ की हड्डी — के अंदरूनी हिस्से में भरा रहता है। इसे शरीर की "रक्त फैक्ट्री" कहा जाए तो गलत नहीं होगा, क्योंकि हमारे खून की तीनों मुख्य कोशिकाएँ यहीं बनती हैं। एक स्वस्थ वयस्क का बोन मैरो हर दिन अरबों नई रक्त कोशिकाएँ बनाता है।

"बोन मैरो शरीर की सबसे व्यस्त फैक्ट्री है — यह चुपचाप हर सेकंड लाखों नई रक्त कोशिकाएँ बनाता रहता है। जब यह फैक्ट्री गड़बड़ाती है, तो पूरा शरीर प्रभावित होता है।"

बोन मैरो के मुख्य कार्य

बोन मैरो का सबसे अहम काम है रक्त कोशिकाओं का निर्माण (hematopoiesis)। यह तीन प्रकार की ज़रूरी कोशिकाएँ बनाता है:

  • लाल रक्त कोशिकाएँ (RBC): ये शरीर के हर हिस्से तक ऑक्सीजन पहुँचाती हैं। इनकी कमी से एनीमिया (खून की कमी), थकान और कमजोरी होती है।
  • श्वेत रक्त कोशिकाएँ (WBC): ये शरीर की रक्षा प्रणाली (immunity) का हिस्सा हैं और संक्रमण से लड़ती हैं। इनकी कमी से बार-बार इंफेक्शन होता है।
  • प्लेटलेट्स (Platelets): ये खून का थक्का बनाकर रक्तस्राव रोकती हैं। इनकी कमी से आसानी से नील पड़ना और ब्लीडिंग होती है।

इसके अलावा बोन मैरो स्टेम कोशिकाएँ (stem cells) भी संग्रहित करता है, जिनसे ये सभी रक्त कोशिकाएँ बनती हैं। यही स्टेम कोशिकाएँ बोन मैरो ट्रांसप्लांट में इस्तेमाल होती हैं।

बोन मैरो के प्रकार

बोन मैरो दो प्रकार का होता है — रेड (लाल) और येलो (पीला)।

प्रकार मुख्य काम कहाँ पाया जाता है
रेड बोन मैरो रक्त कोशिकाएँ (RBC, WBC, प्लेटलेट्स) बनाना चपटी हड्डियाँ — कूल्हा, रीढ़, पसलियाँ, छाती की हड्डी
येलो बोन मैरो वसा (fat) का भंडारण; ज़रूरत पड़ने पर रक्त कोशिकाएँ भी बना सकता है लंबी हड्डियों का बीच वाला हिस्सा

बचपन में शरीर में ज़्यादातर रेड मैरो होता है। उम्र बढ़ने के साथ इसका कुछ हिस्सा येलो मैरो में बदल जाता है। गंभीर खून की कमी या रक्तस्राव के समय, येलो मैरो वापस रेड मैरो में बदलकर रक्त निर्माण बढ़ा सकता है।

क्या आप जानते हैं?
एक स्वस्थ बोन मैरो हर दिन लगभग 200 अरब लाल रक्त कोशिकाएँ और अरबों श्वेत रक्त कोशिकाएँ व प्लेटलेट्स बनाता है — और यह प्रक्रिया जीवन भर चलती रहती है।

बोन मैरो से जुड़ी प्रमुख बीमारियाँ

जब बोन मैरो ठीक से काम नहीं करता, तो खून की गंभीर बीमारियाँ हो सकती हैं। कुछ प्रमुख बीमारियाँ:

बीमारी क्या होता है
ल्यूकेमिया (Blood Cancer)बोन मैरो में असामान्य श्वेत रक्त कोशिकाएँ बेकाबू होकर बनने लगती हैं
एनीमिया (खून की कमी)पर्याप्त लाल रक्त कोशिकाएँ न बनने से ऑक्सीजन की कमी
अप्लास्टिक एनीमियाबोन मैरो पर्याप्त रक्त कोशिकाएँ बनाना ही बंद कर देता है
थैलेसीमियाआनुवंशिक विकार जिसमें असामान्य हीमोग्लोबिन बनता है
मल्टीपल मायलोमाबोन मैरो की प्लाज्मा कोशिकाओं का कैंसर
लिम्फोमालसीका तंत्र का कैंसर जो बोन मैरो तक फैल सकता है

इनमें से कई बीमारियाँ, खासकर ल्यूकेमिया और लिम्फोमा, कैंसर की श्रेणी में आती हैं और इनका इलाज कीमोथेरेपी व अन्य आधुनिक तरीकों से संभव है। ऐसे इलाज के लिए संकल्प हॉस्पिटल में कीमोथेरेपी और कैंसर उपचार की सुविधा उपलब्ध है। कैंसर के शुरुआती लक्षणों को पहचानना ज़रूरी है — पढ़ें कैंसर के शुरुआती चेतावनी संकेत

बोन मैरो की समस्या के लक्षण

जब बोन मैरो ठीक से रक्त नहीं बना पाता, तो शरीर कई संकेत देता है:

  • लगातार थकान और कमजोरी — लाल रक्त कोशिकाओं की कमी से
  • बार-बार संक्रमण या बुखार — श्वेत रक्त कोशिकाओं की कमी से
  • आसानी से नील पड़ना या रक्तस्राव — प्लेटलेट्स की कमी से
  • त्वचा का पीलापन और साँस फूलना — एनीमिया के कारण
  • चक्कर आना — खासकर उठते समय, इसके बारे में पढ़ें सुबह उठते ही चक्कर आने के कारण
  • हड्डियों या जोड़ों में दर्द — बोन मैरो पर दबाव के कारण
  • वजन कम होना और रात में पसीना — कुछ खून के कैंसर में
ध्यान दें: ये लक्षण कई सामान्य कारणों से भी हो सकते हैं। लेकिन यदि थकान, बार-बार संक्रमण, या बिना कारण नील/रक्तस्राव लगातार बना रहे, तो खून की जाँच ज़रूर कराएँ।

बोन मैरो की जाँच कैसे होती है?

बोन मैरो की सेहत जानने के लिए डॉक्टर पहले एक साधारण ब्लड टेस्ट (CBC) कराते हैं। अगर उसमें कोई गड़बड़ी दिखे, तो बोन मैरो एस्पिरेशन और बायोप्सी की जाती है — इसमें आमतौर पर कूल्हे की हड्डी से थोड़ा सा मैरो निकालकर माइक्रोस्कोप में जाँचा जाता है। यह जाँच ल्यूकेमिया, एनीमिया के प्रकार और अन्य रक्त विकारों की सटीक पहचान में मदद करती है।

बोन मैरो ट्रांसप्लांट क्या है?

जब बोन मैरो पूरी तरह खराब हो जाए (जैसे गंभीर ल्यूकेमिया या अप्लास्टिक एनीमिया में), तो बोन मैरो ट्रांसप्लांट जीवनरक्षक हो सकता है। इसमें रोगग्रस्त मैरो की जगह स्वस्थ स्टेम कोशिकाएँ (दाता से या रोगी की अपनी) डाली जाती हैं, जो नई, स्वस्थ रक्त कोशिकाएँ बनाना शुरू कर देती हैं। यह एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें विशेषज्ञ देखभाल की आवश्यकता होती है।

बोन मैरो को स्वस्थ रखने के उपाय

आप कुछ सरल आदतों से अपने रक्त और बोन मैरो को स्वस्थ रख सकते हैं:

  • पोषक आहार लें: आयरन, विटामिन B12, फोलिक एसिड और प्रोटीन से भरपूर भोजन (हरी सब्जियाँ, दालें, अंडे) रक्त निर्माण में मदद करते हैं।
  • हाइड्रेटेड रहें और धूम्रपान न करें: तंबाकू रक्त कोशिकाओं और हड्डियों दोनों को नुकसान पहुँचाता है।
  • संक्रमण से बचाव करें और समय पर टीकाकरण कराएँ।
  • तनाव कम करें और अच्छी नींद लें — देखें तनाव प्रबंधन के तरीके
  • नियमित स्वास्थ्य जाँच कराएँ ताकि खून की किसी भी कमी का जल्दी पता चले। संपूर्ण सेहत के लिए पढ़ें हृदय को स्वस्थ रखने के उपाय
याद रखें: लंबे समय तक किडनी की बीमारी भी एनीमिया का कारण बन सकती है, क्योंकि किडनी वह हार्मोन बनाती है जो बोन मैरो को रक्त बनाने का संकेत देता है। संबंधित सुविधा — डायलिसिस सेंटर

डॉक्टर को कब दिखाएँ?

अगर आपको लगातार थकान, बार-बार बुखार या संक्रमण, बिना कारण नील पड़ना या रक्तस्राव, त्वचा का असामान्य पीलापन, या हड्डियों में लगातार दर्द महसूस हो, तो देर न करें। गंभीर संक्रमण या तेज़ रक्तस्राव की स्थिति में हमारा 24x7 इमरजेंसी सेंटर हमेशा उपलब्ध है। सही जाँच और इलाज के लिए हमारे विशेषज्ञ डॉक्टरों और विभागों से संपर्क करें। चिकित्सा शब्दों को समझने के लिए देखें हमारी मेडिकल शब्दावली, या सीधे अपॉइंटमेंट बुक करें

"बोन मैरो की बीमारियाँ डरावनी लग सकती हैं, लेकिन आज इनका इलाज पहले से कहीं बेहतर है। जल्दी पहचान और सही विशेषज्ञ देखभाल से कई रोगी पूरी तरह स्वस्थ जीवन जीते हैं।"

Watch: Related Videos

Explainers and real patient stories from Sankalp Hospital doctors.

Exercise & Healthy bones your shield against Cancer | Sankalp HospitalExercise & Healthy bones your shield against Cancer | Sankalp Hospital
Symptoms Of Ovarian CancerSymptoms Of Ovarian Cancer

Frequently Asked Questions

बोन मैरो हमारी हड्डियों के अंदर पाया जाने वाला नरम, स्पंज जैसा ऊतक है, जिसे शरीर की 'रक्त फैक्ट्री' कहा जाता है। यह लाल रक्त कोशिकाएँ (RBC), श्वेत रक्त कोशिकाएँ (WBC) और प्लेटलेट्स बनाता है, तथा स्टेम कोशिकाओं को संग्रहित करता है। यह मुख्य रूप से कूल्हे, रीढ़, पसलियों और जांघ की हड्डियों में होता है।

बोन मैरो का मुख्य कार्य रक्त कोशिकाओं का निर्माण है। लाल रक्त कोशिकाएँ ऑक्सीजन पहुँचाती हैं, श्वेत रक्त कोशिकाएँ संक्रमण से लड़ती हैं, और प्लेटलेट्स रक्तस्राव रोकती हैं। इसके अलावा बोन मैरो स्टेम कोशिकाओं का भंडारण करता है, जिनसे ये सभी रक्त कोशिकाएँ बनती हैं।

बोन मैरो दो प्रकार का होता है — रेड (लाल) बोन मैरो और येलो (पीला) बोन मैरो। रेड मैरो रक्त कोशिकाएँ बनाता है और चपटी हड्डियों में पाया जाता है, जबकि येलो मैरो मुख्य रूप से वसा संग्रहित करता है और लंबी हड्डियों के बीच में होता है। ज़रूरत पड़ने पर येलो मैरो भी रक्त कोशिकाएँ बना सकता है।

बोन मैरो से जुड़ी प्रमुख बीमारियाँ हैं — ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर), एनीमिया (खून की कमी), अप्लास्टिक एनीमिया, थैलेसीमिया, मल्टीपल मायलोमा और लिम्फोमा। इनमें से कई कैंसर की श्रेणी में आती हैं और आधुनिक इलाज, कीमोथेरेपी तथा कुछ मामलों में बोन मैरो ट्रांसप्लांट से इनका उपचार संभव है।

मुख्य लक्षणों में लगातार थकान और कमजोरी, बार-बार संक्रमण या बुखार, आसानी से नील पड़ना या रक्तस्राव, त्वचा का पीलापन, साँस फूलना, चक्कर आना, हड्डियों में दर्द, तथा कुछ रक्त कैंसर में बिना कारण वजन घटना और रात में पसीना शामिल हैं। ऐसे लक्षण बने रहने पर खून की जाँच ज़रूर कराएँ।
Dr. Ambar Garg

Consultant Haematologist (रक्त रोग विशेषज्ञ), Sankalp Hospital, Ambikapur